

पांढुर्णा जिले में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। पूर्व जिला न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), नई दिल्ली के सलाहकार श्री प्रकाश भाऊ उइके की पहल पर जिले में NABL मान्यता प्राप्त पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने को लेकर मध्यप्रदेश शासन स्तर पर सकारात्मक सहमति मिली है।
भोपाल में हुई मुलाकात के दौरान श्री उइके ने मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री से चर्चा कर पांढुर्णा जिले में जिला/डिविजन स्तर की NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। मंत्री ने विषय को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।
श्री उइके ने बताया कि नवगठित पांढुर्णा जिले में लगभग 287 ग्राम और 386 बसाहटें हैं, जहाँ बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है। जिले में करीब 1627 हैंडपंप और 252 ग्रामीण नल-जल योजनाएँ संचालित हैं, जिनसे पांढुर्णा, सौंसर एवं नंदनवाड़ी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की जाती है।
उन्होंने बताया कि इतने बड़े स्तर पर पेयजल योजनाएँ संचालित होने के बावजूद जिले में अभी तक NABL मान्यता प्राप्त कोई भी पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला नहीं है, जिसके कारण पानी की गुणवत्ता का प्रमाणित परीक्षण नियमित रूप से नहीं हो पाता।
प्रयोगशाला बनने से होंगे ये बड़े लाभ
पेयजल की वैज्ञानिक एवं प्रमाणित जांच संभव होगी
फ्लोराइड, आयरन, आर्सेनिक और बैक्टीरिया की समय पर पहचान
जल जीवन मिशन एवं नल-जल योजनाओं की बेहतर निगरानी
स्थानीय स्तर पर जांच से समय और खर्च की बचत
पानी की समस्या पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई
आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के जनस्वास्थ्य की सुरक्षा
रिपोर्ट कानूनी रूप से अधिक विश्वसनीय होगी
श्री प्रकाश भाऊ उइके ने कहा कि पांढुर्णा जिले में NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की स्थापना सुरक्षित पेयजल, जनस्वास्थ्य और आदिवासी हितों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
उन्होंने इस विषय पर सकारात्मक सहमति देने के लिए मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही पांढुर्णा में प्रयोगशाला स्थापना की प्रक्रिया शुरू होगी।






